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सचित्र वैदिक गीता | योद्धाओं के लिए युद्धभूमि में रचा गया युद्ध ग्रन्थ | आर्य मुनि (Paperback - Hindi)
गीता को वास्तविक अर्थ में समझने का आनंद तभी आता है, जब किसी भी व्याख्या से प्रभावित हुए बिना उसके मूल श्लोकों के अर्थ को समझने का प्रयास किया जाए । जब ऐसा प्रयास किया जाता है, तब जिज्ञासु यदि बाद में विभिन्न टीकाएँ, व्याख्याएँ और भाष्य पढ़े, तो उसे स्पष्ट अनुभव होने लगता है कि कहाँ-कहाँ अर्थों को खींचा गया है ।
हमारा प्रयास भी यही है कि मूल को पूर्ण न्याय देते हुए व्याख्या की जाए । मूल ग्रन्थ के प्रति न्याय करना ही वास्तविक शास्त्रसाधना है ।
इस ग्रन्थ का नाम ‘वैदिक गीता’ इसीलिए है कि गीता के सभी श्लोकों का अर्थ और उसका भाष्य वेद, उपनिषद और दर्शनों को मूल में रखकर किया गया है । इस भाष्य में किसी मत, संप्रदाय या गीता के अन्य भाष्यकारों का खंडन-मंडन नहीं है ।
प्रत्येक अध्याय के प्रारम्भ में उस अध्याय के विषय के बारे में संक्षिप्त में चर्चा की गई है । इस भाष्य में गीता के श्लोक के नीचे उस श्लोक का ‘पदच्छेद’ दिया गया है । ‘पदच्छेद’ के बाद उस श्लोक का ‘पदार्थ’ दिया गया है, जिस में श्लोक के हर एक शब्द का अर्थ किया गया है । श्लोक का ‘पदार्थ’ अर्थात श्लोक के शब्दों का अर्थ करते समय वाक्य रचना इस प्रकार बनाई गई है कि वाक्य पढ़ने में अर्थात श्लोक का अर्थ समझने में सुगमता हो ।
हालाँकि श्लोक का ‘पदार्थ’ ही श्लोक के मूल अर्थ को समझाने में पर्याप्त है पर जहाँ जहाँ आवश्यकता लगी वहाँ वहाँ उस श्लोक का भाष्य भी लिखा गया है । उसके उपरांत जहाँ कुछ सन्देह उत्पन्न हुए है, वहाँ उस सन्देह का समाधान भी दिया गया है । पूर्व श्लोक का अगले श्लोक के साथ संबध स्थापित करने के लिए दो श्लोकों के बीच संक्षिप्त में ‘संगति’ भी लिखी गई है ।
गीता ग्रन्थ के आरम्भ में गीता के कुछ महत्वपूर्ण शब्द जो सदैव अलग से स्मरण रखने योग्य हैं उसकी व्याख्या दी गई है ।
गीता भाष्य को और रसप्रद बनाने के लिए योग्य स्थानों में कुछ चित्र भी डाले गए है ।
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